पिता
ये बात उस समय कि है ,
जब मैं इस दुनिया मे आया था ।
नन्ही सी आँखे छोटे छोटे उंगलियां थी।
पापा का गोद मेरे रोने कि आवाजे थी,
ये बात उस समय कि है ,
जब दुनिया मेरे लिए अनजान थी।
ना मुझे किसी चीज़ का परख था ,
ना किसी चीज़ का समझ था ,
फिर भी वो सारी बातें बताता था।
उसके खुद के सपने अधूरे थे ,
पर मेरे लिए बुन रहा था ।
ये बात तब कि है ,
जब दुनिया मेरे लिए अनजान थी।
मैं जैसा भी था,पर उसका दुलारा था ।
वो पिता था ,जिसके बिना घर अधूरा था ।
उसके खुद के सपने अधूरे थे,
पर उसे मेरे सपने पूरे करने थे ।
वो पिता था,जिसका मैं दुलारा था।
उसे ना खबर थी सुबह कि ,ना शाम का ठिकाना था ।
उसे सिर्फ मेरे सपने पूरा करने का फ़िक्र सताता था
वो पिता था ,जिसका प्यार निराला था ।
वो पिता था,जिसका मैं दुलारा था।
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